गुरुवार, 9 सितंबर 2010

ग़ज़ल पढ़िए और देखिये कि कैसे एक कुकुर को आती है गिनती और जोड़, घटाना------->>>दीपक मशाल

आदरणीय अग्रज श्री राजेन्द्र स्वर्णकार जी द्वारा मेरी इस रचना को ग़ज़ल का स्वरुप दिया गया है.. उनका बहुत आभारी हूँ..
 
बड़ी मुश्किल से हाथ आए , तुम्हें हम जाने कैसे दें
अभी पैदा हुई ख़्वाहिश , अभी मर जाने कैसे दें
अभी तो रूठ कर आया है इक बादल समंदर से
ज़मीं प्यासी है , इसको लौट कर अब जाने कैसे दें 
तुम्हीं ने आज़माया है , मेरी सच्चाई को यारों
तुम्हारे झूठ पर पर्दा कोई पड़ जाने कैसे दें
' भुला देना न मुझको ' - यूं कहा करते थे तुम अक्सर
न भूलेंगे तुम्हें हम … टूट ये  दिल  जाने  कैसे दें.
इन्हीं ज़ख़्मों की ख़ातिर पूछने आते वो घर मेरे
कोई ज़ख़्मों से कहदे , हम उन्हें भर जाने कैसे दें 
बरी हो'के तू निकला है, अदालत से अभी , लेकिन
मुकद्दमे और भी हैं जो  कहे  - ' हम जाने कैसे दें '
जहां को तू बदल डाले , नहीं इतना भी तू क़ाबिल
'मशाल' अब जां पॅ तुझको खेलते ही जाने कैसे दें 
दीपक मशाल
अब यहाँ देखिये क्या कमाल की ट्रेनिंग दी गई है इन साहब को कि गणित भी आता है..अब कोई बच्चा जो काहे कि मैथ्स मुश्किल है तो कौन मानेगा.. मास्टर तो यही कहेंगे कि ''कुत्तों को भी गणित आता है''




35 टिप्‍पणियां:

  1. Pahle ye galatfahmi ye hui ki mujhe 'cooker'yani pressure cooker laga!Khana jo bana rahi thi!
    Ab video dekhti hun...
    Rachana to khair..kya kahne!

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  2. दीपक जी
    बहुत उम्दा ग़ज़ल कहने के लिए आपको और आपके साथ साथ राजेंद्र स्वर्णकार जी को भी बधाई !

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  3. very nice...............
    lagta hai ab math pahle jaisa tilism nahi rah jayega.gazal bhi bhoot achchhi lagi.

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  4. हमने तो गज़ल ही पढ़ी है अभी बहुत उम्दा है ..

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  5. हा हा , विडियो मस्त है दीपक जी,
    और गज़ल तो है ही उम्दा

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  6. सुन्दर.........हर बार की तरह
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड और साथ में जय श्री राम

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  7. आप की रचना 10 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com


    आभार

    अनामिका

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  8. गजल तो आप की हमेशा बहुत अच्छी होती है, लेकिन आज इस विडियो ने भी कमाल कर दिया, बहुत सुंदर जी

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  9. आजकल बहुत ही बढ़िया लिखने लगे हो...लेखन में निखार आता ही जा रहा है...जारी रहें यह प्रवाह...ढेरों शुभकामनाएं.

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  10. बरी हो'के तू निकला है, अदालत से अभी , लेकिन
    मुकद्दमे और भी हैं जो कहे - ' हम जाने कैसे दें '


    -ये कुकर महाराज तो विवादित हो लिए हैं.

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  11. बहुत सुन्दर ग़ज़ल .......बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ !!

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  12. भुला देना न मुझको और न भूलेंगे तुम्हें हम.... वाह वाह

    ये कुकुर तो गजब ही कर दिये हैं

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  13. "इन्हीं ज़ख़्मों की ख़ातिर पूछने आते वो घर मेरे
    कोई ज़ख़्मों से कहदे , हम उन्हें भर जाने कैसे दें"
    बहुत शानदार गज़ल। दीपक और राजेन्द्र जी दोनों को बहुत बहुत बधाई।
    वीडियो अभी देखना है।

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  14. प्रिय दीपक ,
    पढकर अच्छा लगा ! आज से राजेन्द्र भाई गज़लतराश हुए !

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  15. अच्छी रचना दीपक जी...
    मुझे सुझाव देने के लिए..धन्यवाद
    मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगेगा...यदि आप मेरी गलतियों को सुधारने में मेरी मदद करें...

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  16. बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल..... बेहतरीन!

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  17. अभी तो रूठ कर आया है इक बादल समंदर से
    ज़मीं प्यासी है , इसको लौट कर अब जाने कैसे दें
    वाह....
    तुम्हीं ने आज़माया है , मेरी सच्चाई को यारों
    तुम्हारे झूठ पर पर्दा कोई पड़ जाने कैसे दें...
    कमाल का शेर है...
    दीपक जी, आपको और राजेन्द्र स्वर्णकार जी को बधाई.

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  18. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  19. ....बहुत ही उमदा गजल है....आप को बहुत बहुत बधाई और श्री राजेन्द्र स्वर्णकार जी को भी बहुत बहुत बधाई!

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  20. बेहतरीन गज़ल
    आज प्रूफ़ हो गया गणित कुत्तो को ज्यादा आती है .

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  21. जहां को तू बदल डाले , नहीं इतना भी तू क़ाबिल
    'मशाल' अब जां पॅ तुझको खेलते ही जाने कैसे दें
    वाह बहुत शानदार गज़ल है बधाई और वीडीओ भी बहुत मज़ेदार है। आशीर्वाद।

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  22. जहां को तू बदल डाले , नहीं इतना भी तू क़ाबिल
    'मशाल' अब जां पॅ तुझको खेलते ही जाने कैसे दें
    हर बार की तरह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल

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  23. गणेश चतुर्थी और ईद की बधाइयां, दीपक जी!

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  24. धन्यवाद दीपक जी...मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए....और मेरी कविता को इतना महत्वपूर्ण स्थान देने के लिए...

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  25. लिखते तो आप लाजवाब सदा ही हैं...इसबार भी कुछ कम नहीं है...लेकिन यहाँ गणितज्ञ कुत्ते से मिलवाकर आपने अचंभित कर दिया...सचमुच यह किसी अजूबे से कम नहीं...

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