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गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

अन्ना का समर्थन... गणेश रायबोले की कवितायें---->>>दीपक मशाल

श्री अन्ना हजारे 


मेरे पसंदीदा कवियों में से एक श्री गणेश रायबोले की कुछ कवितायें जो आजकल के हालात पर एकदम फिट हैं,  आदरणीय श्री अन्ना हजारे जी के समर्थन में, जन लोकपाल बिल के समर्थन में इन कविताओं के साथ एक हाथ मेरा भी.... 
आइये सन १९४७ में गोरे अंग्रेजों द्वारा काले अंग्रेजों को हुए सत्ता हस्तांतरण के बाद पुनः पुनः इन काले हिटलरों को होते आ रहे हस्तांतरण को विराम देने के लिए उठ खड़े हों. आइये भारत आज़ाद कराएं...

सत्ता राक्षस
हिटलर को मारता हिटलर
लोग खुश हो जाते हैं
चलो मरा हिटलर
हिटलर हँसता है
अभी का नहीं
हजारों बरस का यह सिलसिला है.
श्री गणेश रायबोले 


देश का मतलब

जब वह वोट मांगता है
तो उसके लिए
देश का मतलब 'हम लोग' हैं
हम लोग जो फैले हुए हैं
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
गुजरात से अरुणांचल तक,
जबकि जीत जाता है
तो उसके लिए देश का अर्थ सिकुड़ जाता है
अम्बानी हो जाता है.

बदनाम जंगलराज
साजिशन बदनाम किया जाता है 
जंगलराज
जंगल में कोई अपनी जीविका के लिए 
आवश्यक धरती, आवश्यक आसमान से 
ज्यादा नहीं लेता
जंगल जानता है
जीविका के लिए
जितना जरूरी है
उससे ज्यादा लेना
जघन्य अपराध है,
जंगलराज में नहीं होते
कभी न भरने वाले सर्वभक्षी
सत्ताईस सत्ताईस मंजिला पेट
जंगलराज होता है
न्याय का राज
संतुलन का राज.

गणेश रायबोले 
(पत्रिका तीसरी दुनिया से ली गई कवितायें)

साथ में एक मेरी लघुकविता-
एक राजनैतिक सीमा पार करने की सज़ा 
सत्ताईस साल जेल..
एक देश लूटने की सज़ा?? 
एक देश पर हमले की सज़ा?
बेगुनाहों को गोलियों से भूनने की सज़ा?
अभी कुछ सोचा नहीं
तय भी नहीं 
मिलेगी या नहीं..
क्या पता दे ही दें 
सत्ताईस साल बाद..
दीपक मशाल 

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