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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

एक निहायत जरूरी पोस्ट, ये कोई मजाक नहीं------>>>दीपक 'मशाल'

नक्सली समस्या पर जो विचार मैं लिखना चाहता था और जो सवाल उठाना चाहता था वो कुछ तो गुस्से की वजह से सोच नहीं पाया और कुछ समयाभाव में... लेकिन आज एक ऐसी पोस्ट पढ़ी जो इस विषय पर एक सम्प्पूर्ण पोस्ट लगी लेकिन बहुत दुखद है कि इससे पहले से भी कई बेहतरीन पोस्ट लिखती आ रहीं लाइफ ब्लॉग की लेखिका श्रीमती रौशनी साहू जी को बहुत कम लोगों ने पढ़ा जबकि उनकी नक्सल समस्या पर लिखी गई कल की पोस्ट नक्सल आखिर चाहते क्या हैं? वास्तव में एक बहुत गंभीर और विचारणीय पोस्ट है इसलिए उनकी अनुमति से यहाँ पुनः आप लोगों के सामने रख रहा हूँ. साथ ही आपसे गुज़ारिश करूंगा कि यारों-दोस्तों की पोस्टों के चक्रव्यूह से निकाल ऐसी पोस्टों पर नज़र डालें.. मुझे पूरे अपने से मिलते विचार लगे तो मैं इस पोस्ट को यहाँ ले आया. आपको लगेंगे या नहीं.. ये भी नहीं जानता.

केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के दूसरे शांतिवार्ता प्रस्ताव का जवाब नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में ७६ जवानों का खून बहा कर दिया।
यह घटना दंतेवाड़ा (छ. ग. ) के चिंतलनार थाने की है जहाँ नक्सलियों ने सोची समझी साजिश के तहत पूरे जवानों को घेर कर इस कारनामे को अंजाम दिया।
देश की जनता इनका कारण जानना चाहती है।
सबसे पहले हमारे देश के पूज्यनीय नेताओं से प्रश्न :-
  • ये नक्सली कौन हैं और इनका मकसद क्या है क्या आपने ईमानदारी से इसका जवाब ढूँढने की कोशिश की है?
  • ग्रीन हंट ऑपरेशन क्या है?
  • आप नक्सलियों को मारना क्यों चाहते हो? उन्होंने कभी आम जनता की जान नहीं ली यह जरूर है कि जनता कि संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर वे जनता को परेशां करते हैं पर यह आपके द्वारा बढ़ाई गई महंगाई से बेहद कम नुकसान है।
  • नक्सलियों के सफाए की बात सोचते वक्त आपका दृष्टिकोण क्या होता है?क्या कभी इस नज़र से देखने की कोशिश की है कि यह भी हमारे भाई ही हैं।
  • इस शतरंज के खेल में आपको ही हर बार क्यों मात खानी पड़ रही है?
  • बेहतर रणनीति किसकी है? आपकी या फिर नक्सलियों की?
  • जहाँ तक हमें यह जानकारी प्राप्त हुई है की भोले भाले आदिवासियों के विश्वास को आप लोगों ने शिक्षा और दवाईयों से जीता और उनकी सारी जमीन हथिया ली और शोषण किया। परिणाम आज सामने है। यह कहाँ तक सच है यदि है तो इसका समाधान क्या है? या फिर और कुछ बात है?
नेता बनने के बाद क्या आप ईश्वर से भी अपने को ऊपर मान बैठे? यह जीवन उस की दी हुई सौगात है। जीवन और मृत्यु एक शाश्वत सच है सभी को इसका सामना करना पड़ता है आप ना कुछ लेकर आये हैं ना कुछ लेकर जायेंगे अगर ले जा सकते हैं तो सिर्फ संस्कार, निरंतर सुख़, निरंतर सम्मान और निरंतर समृधि जो इस तरह से नहीं कमाई जा सकती।
इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान ढूँढने में आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। आप यदि जीतना चाहते हैं तो जीत सही मायने में वही होगी की आप नक्सलियों का ह्रदय भी जीते। यह कार्य सच्ची लगन से होना चाहिए।
नक्सलियों के लिए दिलों में नफ़रत नहीं बल्कि उनको समझने का प्रयास करना होगा नहीं तो हम ऐसे ही जवानों का खून बहता देखेंगे। माताओं की गोद , बहनों की कलाईयाँ और सुहागिनों की मांग सुनी हो जाएँगी। कुछ पलों की हमदर्दी जताकर आप उन्हें भूल जायेंगे और छोड़ जायेंगे उन्हें हमेशा के लिए तन्हा। फिर एक नई तैयार औरों के जीवन को सुना करने की।

नक्सलियों से प्रश्न :-

  • क्या चाहते हैं आप?
  • अपने अधिकारों के लिए जिस रास्ते को आपने चुना क्या वह सही है?
  • किसके खिलाफ लड़ाई है आपकी ? अपने स्वयं के देशवासियों से /अपने देश से?
  • शांति का रास्ता छोड़ हथियारों का साथ पकड़ने से आप कहाँ तक सफल हो पाएंगे?
  • क्या आपको अपने वाकई में अपने देश और लोगों से स्नेह है?
  • आपकी हरकतों से आपके बच्चे क्या सिखेंगे? हथियार पकड़ना, बारूदी सुरंग बिछाना या और कुछ?
  • पाकिस्तान और बाकि कुछ राष्ट्रों का हाल तो आपने देखा ही है कि क्या हो रहा है दूसरों का बुरा सोचने से स्वयं भी उसके प्रभाव से बच नहीं सकते। वैसे औरों का भला करने से स्वयं का भी भला होता है।
  • संकीर्ण मानसिकता को त्यागकर दूरदृष्टि अपनाएँ जिसमें जन का भला हो।
  • आप अपनी ही सरकार से इतने क्रोधित क्यों हैं? हर क्षेत्र में आप लोगों के लिए बहुत कुछ किया जा रहा है जबकि पीड़ित तो सामान्य वर्ग के लोग हैं जो पढ़ लिख कर बेरोजगार बैठे हैं।
  • नक्सली नेताओं से मेरा यह सीधा प्रश्न है कि आप और देश के नेताओं में फर्क क्या है? यद्दपि उन्होंने आदिवासियों कि जमीने , शिक्षा और दवाईयों के नाम से हड़प ली हैं तो आप क्या कर रहे हैं उन भोले भाले आदिवासियों को मोहरा बनाकर अपने स्वार्थसिद्ध करने में लगे हैं।
  • एक तरफ हमारे जवान प्यादे हैं तो दूसरी तरफ आपने भोले भाले आदिवासियों को प्यादा बनाकर रखा है। यह दोनों ही सूरत हमारे अपनों के लिए घातक है।
  • क्या आप वाकई में आदिवासियों की भलाई चाहते हैं या फिर हमारे परम दुश्मनों की सहायता कर देश में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं?
आपके असली चेहरे उजागर होने चाहिए यदि आप सही है तो जनता आपके साथ होंगी और यदि आप गलत हैं तो अपने आप अपने नापाक इरादों में कभी कामयाब नहीं हो सकते।
जवानों और अफसरों से प्रश्न:-

  • माना अनुशासन से भरी हुई जिन्दगी आपकी होती है इसका मतलब यह नहीं की आप मशीन हो गए! जिसने चाहा जब चाहा वहां बगैर किसी ठोस उपाय के आपको लगा दिया।
  • जब आप दुश्मनों के सामने होते हैं तो आपकी पहली शर्त होती है उनका सफाया हथियारों से। क्या आपकी नज़रों में यह सही है?
  • क्या आप देश के नेताओं के मात्र कठपुतलियाँ रह गए हैं?
  • नक्सल क्षेत्रों में जब आप जाते हैं तो आप नेताओं से ज्यादा उनके करीब होते हैं क्या आपने कभी उनके दिलों तक जाकर उन्हें समझने की कोशिश की है?
  • क्या किसी भी समस्या का समाधान हथियार ही है?
  • आपके लिए कौन महत्वपूर्ण है ? हमारा देश, देशवासी या हमारे नेताओं के आदेश?
शहीद हुए जवानों के परिवारों से हम कहना चाहते हैं कि हम सब देशवासी आपके साथ हैं और आपके अपनों की शहादत यूँ ही व्यर्थ नहीं होने देंगे। हम तब तक आवाज़ उठाते रहेंगे जब तक समाधान न मिले।

दीपक 'मशाल'

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