सूरज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सूरज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

कोहरे के दिनों के लिए खास-----चित्र सहित-------->>>>>>>दीपक 'मशाल'

कोहरे के दिनों के लिए एक खास क्षणिका-

१-
सूरज भी लगता है चंदा
कोहरे का कुछ ऐसा फंदा
आज नज़र वालों को देखा
चलते राह में होके अंधा.

२-
क़त्ल मुजरिम ने किया है
सजा मुलजिम ने पायी है
बेवफा हैं वो लकीरें
जिनसे तेरी आशनाई है
कौन करता जिरह उसके लिए
जिससे काजी की रंजिशाई है
उस शमा का क्या मतलब
जिसके जलते ही सुबहा आई है

३-
ज़िंदगी और ख्वाहिशें कुछ ऐसे मिल गयीं
के मुद्दतों से ख्वाहिशें पैदा हुई नहीं
मचलती नब्ज़ देख के कह गया हकीम
ख्वाहिशें बाकी रहीं बस ज़िन्दगी नहीं..

४-
काश कोई दीवार न होती
तेरी मेरी हार न होती
जीने को जी लेते हम भी
जो तेरी कमी हरबार न होती..

दीपक 'मशाल'
चित्र- अपनी तूलिका से..

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...