दोस्तों आज आपके सामने कुछेक पुरानी कवितायेँ, जो कहीं प्यार सिखाती हैं तो कहीं दोस्ती के नए आयाम बतलाती हैं और आखिरी कविता जो बताती है कि आपके कल का असर आअज पर पड़ता ही है आप उसे ख़त्म नहीं कर सकते... और जो आज कर रहे हैं उसका असर आने वाले कल पर पड़ना ही है...,..लिख रहा हूँ... और साथ में दिखला रहा हूँ कुछ तस्वीरें जो मैंने अपने मोबाइल से ली हैं इसके अलावा किसी से आपका परिचय भी कराता हूँ... तो पहले कवितायेँ....
१-
चराग-ए-मोहब्बत बुझते नहीं
आंधियां आयें चाहे कितनी बडीं
धूल जमती नहीं रिश्तों पे इन
रहो तुम कहीं या रहें हम कहीं
रूहें हो जाएँ इक बस वही प्यार है
जिस्म से एक होना मोहब्बत नहीं
क्यों मांगूं खुदा से तुम्हें मैं 'मशाल'
तुम मेरे हो खुदा की अमानत नहीं.
अब कविता दोस्ती पे-
2-दोस्ती का पैमाना-
अक्सर देखा जाता है
क्या और किस वक़्त
दिया हमें,
उस शख्स ने
जो दोस्त कहलाता है.....
सदियों से चला आ रहा यही बस
दोस्ती का पैमाना है
कि बदवक़्त में जो काम आए बहुत
सच्चा दोस्त समझा जाता है.
मगर क्यों नहीं सोचती
कुछ इस तरह दुनिया
कि क्या दिया हमने हमेशा
उस शख्स को
जिसे दोस्त कहते हैं हम,
क्यों दोस्ती में आड़े लाते हैं स्वार्थ....
जब सोच लोगे तुम कि
क्या दिया तुमने दोस्त को
बिना वापसी की उम्मीद के
उसी दिन
हाँ ठीक उसी दिन
रखोगे तुम पहला कदम
उस दहलीज़ पर
जिसे कहते हैं हम
दोस्ती का पैमाना......
३- आज
अपनी जिंदगी की
अधूरी किताब के
कुछ पिछले पन्नों को
फाड़ने की कोशिश में
मैं
नए पन्ने पे आज का
ये हिसाब भी चढ़ा गया....
और जब
भरे हुए
काले पन्ने जलाने बैठा
तो कुछ कोरे भी सुलगा गया.....
दीपक मशाल
तो ये हैं वे तस्वीरें जो मैंने कहीं किसी प्लेटफार्म पर लीं तो कोई किसी पुरानी हवेली की.... और कोई बहुत पुराने पुल की....
वैसे दिमाग में और खेल में इनका कोई सानी नहीं (कम से कम आस पास के विद्यालयों में या पूरे जनपद में तो नहीं है) क्योंकि इन्हें अंतर्विद्यालयी स्तर पर सर्वश्रेष्ठ वक्ता प्रतियोगिता का द्वितीय पुरस्कार मिल चुका है जो कि कक्षा ६ से १२ तक के विद्यार्थियों का एक साथ था जबकि दिए गए विषय पर १५ मिनट में सोच कर तुरंत बोलना था... कमाल ही है कि एक बच्चा १२ तक के विद्यार्थियों के बीच द्वितीय भी आये... पढ़ाई में अब्बल हैं तो अभिनय में भी और क्रिकेट में भी... समझ नहीं आता इन्हें बनायें क्या इसलिए सबसे बेहतर समझा कि इनके ऊपर ही छोड़ दें और तब इन्होने कहा कि मैं मॉडल और वैज्ञानिक बनूँगा... अब देखते हैं कितने कामयाब होते हैं ये... आपकी आशीष चाहिए....
ये नीचे दो तस्वीरें हैं
श्वेत-श्याम तस्वीर मेरी जिस मित्र की है रंगीन भी उसी की बेटी की ही है जो अभी मात्र २ महीने की है... सुनते थे like father like son.. लेकिन यहाँ तो like mother like daughter हो गया.. :)
ये हैं मेरे प्यारे मिस्टर चिंटू जी(प्रथम भाई) जिनके लम्बे बिना मुंडन वाले बालों कि वजह से इन्हें सब सरदार चिंटा
सिंह जी कहते हैं.... अरे इनकी भोली सूरत और मासूम सी आँखों पे मत जाइये... ये खतरनाक भी चींटा(Male ant) की तरह ही हैं....
और इनके साथ इनकी दीदी मेरी प्यारी बहिन साक्षी जी(ये सच में शराफत की प्रतिमूर्ति है)
फिर से मास्टर तथागत जी
ये हैं कविवर श्री भवानी शंकर लोहिया ''बन्धु'' जी मेरे बाबा के मित्र और वो कवि जिन्होंने मुझे 'मशाल' नाम प्रदत्त किया...
ये किस तरह के कवि हैं ये बताने के लिए सिर्फ इनकी बहुत ही मामूली २ पंक्तियाँ यहाँ दे रहा हूँ बाकी आप स्वयं ही समझ दार हैं-
''यज्ञ तुम हो आहुति मैं,
तुम मलय मैं गंध हूँ.
देवता तुम मैं पुजारी
गीत तुम मैं छंद हूँ..''
पुस्तक 'अनुभूतियाँ' विमोचन के अवसर पर....
और ये रही वो पुस्तक
कैसा लगा ये सफ़र बताएं जरूर...
आपका ही-
दीपक मशाल
















