बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

अरे भाई मैं मरने नहीं जा रहा हूँ###############........दीपक 'मशाल'

आप मानें या ना मानें हर व्यक्ति अपने जीवन में हमेशा सकारात्मक सोच नहीं रख सकता, कभी ना कभी हताश या निराश होके वो नकारात्मक सोच का लबादा ओढ़ ही लेता है. कई बार जानबूझ कर तो कई बार अनजाने में....
ऐसे ही एक बार मेरे मन में भी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में लिखने का विचार आया... जो जीवन से थक सा गया है और मौत, जो की एक अटल सच्चाई है, को एक प्रेमिका की तरह आलिंगन के लिए तत्पर है...... लेकिन पिछली कविताओं के निकाले गये अर्थ(अनर्थ) की तरह इसका ये अर्थ मत निकाल लीजियेगा की मैं नकारात्मक सोच अपना चुका हूँ....
अरे भाई मैं मरने नहीं जा रहा हूँ.................. जब कभी ऐसा सोचूंगा तो आत्म हत्या के लिए आतंकवादियों की टोली के बीच जाऊंगा जिससे की मरने से पहले १०-१२ को मारकर कुछ दहशतगरदों  से तो अपनी ज़मीं को आज़ाद करा सकूं.....
देखिये इस बार क्या बकवास लिख डाली....


ऐ मौत!!!!!!!!!!!!!!!! 
ऐ मौत!
मैं दरवाज़े पे खडा हूँ,
तुम आओ तो सही,
मैं भागूंगा नहीं........
कसम है मुझे उसकी,
जिसे
मैं सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ,
और उसकी भी
जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करता है.
या शायद दोनों.........
एक ही हों.
एक ऐसा शख्स
या ऐसे दो शख्स
जो आपस में गड्डमगड्ड हैं..
मगर जो भी हो
है तो प्यार से जुड़ा हुआ ही न....
वैसे भी...
गणित के हिसाब से
अ बराबर ब
और ब बराबर स
तो अ बराबर स ही हुआ न....
जो भी हो यार
मगर सच में
उन दोनों की कसम...
उन दोनों की कसम, मैं भागूँगा नहीं.
कुछ लोग कहते हैं कि-
'जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं'
अरे
तो तुम तो इनाम हुई न
और भला इनाम से
क्यों कर मैं भागूंगा?
और फिर वो इनाम जो.....
आखिरी हो
सबसे बड़ा हो,
जिसके बाद किसी इनाम की जरूरत ही न रहे..
उससे भला मैं क्यों कर भागूंगा?
इसलिए
ऐ मौत....
तुम्हे
वास्ता है खुद का,
खुदा का
आओ तो सही
मैं भागूंगा नहीं.........
दीपक 'मशाल'

जय हिंद

20 टिप्‍पणियां:

  1. "marne ke liye atankwadiyon ke beech...." kya khoob likha hai bhai..

    "ganit ke hisaab se
    a barabar b
    aur b barabar c
    to a barabar c..."
    arey nahi ji.. ye to zeroth law of thermodynamics ho gaya... :P

    "aao to sahi,
    bhagunga nahi.."
    acchi chunauti...

    jai hind...

    उत्तर देंहटाएं
  2. Deepak,
    nakaratmak soch jab aate hain uske baad hi sakaratmakta badh jaati hai....jaise raat ke baad subah.....aur ismein koi dosh nahi...
    lekin tumhari ye kavita .....
    har maine main sakaratmak hai...maut ko chunauti ? bahut accha...!
    aur haan wo plan bhi ekdam first class hai..
    'HAM TO DOOBENGE, TUMHEIN BHI LE DOOBENGE SANAM...!!
    Bahut sundar likha hai...aur ye DIDI nahi bol rahi hai...sach mein...
    Didi

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक अंधेरा, लाख सितारे,
    एक निराशा, लाख सहारे...
    सबसे बड़ी सौगात है जीवन,
    नादां हैं जो जीवन से हारे...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  4. दिन निकलता है...रात होती है...

    रात होती है..फिर दिन निकलता है...

    ज़िन्दगी यूँ ही आबाद होती है

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  5. deepak..... negative thinking hi na positive ki or le jaati hai..... tumhare negativeness mein bhi positiveness hai.....

    jhakjhorne wali feelings ke saath likhi gayi ek behtareen kavita....

    1 day sure u ll tuch d horizon f success..... with d string f hope ..... wid positive attitude .....killin ol negatessssssssssss................

    gr8

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  6. आत्महत्या जीवन की अधोतम स्थिति होती है. जिन्दगी के लिये निदान तो जिन्दगी ही देती है, पलायन तो कोई हल है ही नहीं.
    बहुत अच्छी कविता

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  7. वर्मा जी की बात ही दोहराता हूँ...कविता अच्छी है.

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  8. दीपक्जीइतनासुन्दर लिखे है फिर भी आप कह रहे है कि बकवास लिखा है

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  9. मौत को आँखें दिखाने वाले साहसी कम ही होते हैं ...आपके साहस को सलाम...!!
    आत्महत्या एक बहुत ही आसान विधि है हर दुःख दर्द से छुटकारा पाने की ...ये अनमोल जिंदगी आसान राह चुनने के लिए है भी नहीं ...!!

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  10. मौत तो सच्चाई है उससे घबराना कैसा वह तो आयेगी ही जिंदगी संघर्ष है उससे लड़ो ।

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  11. सब रिटर्न टिकट लेकर आते हैं,ये अपन का फ़ेवरेट डायलाग है,बहुत बढिया लिखा भाई जी।

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  12. आप तो मौत को हड़का रहे है
    आप को सलाम

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  13. ऎसी बात दिमाग में आई ही कहाँ से????
    कविता हर बार की तरह ही अच्छी है. लेखनी में लगातार आती धार के लिए बधाई

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  14. अंत में यह लिखना था कि;
    मैं दरवाजे पर खडा-खडा कविता लिखने में मग्न था
    तभी वह आ गई जिसे मै सबसे अधिक प्यार करता हूँ !

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  15. बहुत ही बेहतरीन लिखा है आभार

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  16. ये क्यaा लिख डाला अरे खुशदीप जी की बात पर गौर करो। बच्चे मरने मराने की बातें नहीं करते। वैसे रचना अच्छी है बहुत बहुत आशीर्वाद

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  17. ये मेरी नकारात्मक सोच नहीं बल्कि सिर्फ लिखने की कोशिश की है जो एक हताश सा मन सोच सकता है.....कभी कभी

    जय हिंद

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