मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

अंग्रेजों के देश में यूं ही चलते फिरते उपजी एक हिंदी कविता और उसका English रूपांतरण-------->>>>दीपक 'मशाल'

हो सकती थी सोनचिरइया मेरे भी जीवन में इक
इन्द्रधनुष के सातों रंगा सकते थे मुझको भी दिख
होती कुछ ज्यादा ही रौशन रौशनी मेरे जीवन की
जो तुम थोड़े सस्ते होते तो सकता था मैं भी बिक
ऋतु वसंत की हो जाती कुछ ज्यादा ही सुन्दर सी
मैं एकाकी इक मानव हूँ ये टूट भी जाता मेरा मिथ
स्वर्णिमपल कुछ पल सकते थे इक अँधेरे से दिन में
जो अपनी थोड़ी सी साँसें तुम मेरे नाम पे देते लिख
मैं भी फिर विश्वास से कहता अपनी अगली पीढ़ी से
इकतरफा उसका न्याय नहीं जो सबके दिल में रहता टिक..

There could be a golden bird in my life too,
could see all the flying colors
of a rainbow...
Light of this life could be brighter
than its size,
your reduced price might make it possible
to buy you at my cost.
Spring could be more beautiful as well
and eventually it could break my myth
of being all alone.
A few golden moments
could get nourish in a dark day,
with the conditional effect of
payment of some of your breaths to me...
And finally I could also project impartial
to the Almighty,
with a firm belief
to the next generation...

दीपक 'मशाल'
स्कैच अपनी पेन्सिल से...

21 टिप्‍पणियां:

  1. स्केचिंग ही बेहतर होगी मित्र ! और क्या कहें !

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  2. वाह दीपक ये अलग अंदाज़ भी खूब पसंद आया , बहुत ही सुंदर प्रयास है
    अजय कुमार झा

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  3. अंग्रेज़ी से हिन्दी तो बहुत से लोग करते है लेकिन हिन्दी से अंग्रेज़ी बहुत कम लोग करते है ..अच्छा लगा । कुछ मेरी कविताओं के अनुवाद भी करो ।

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  4. दीपक,
    शऱद भाई की बात सुनो...नए नए अंदाज़ दिखाते रहा करो...

    जय हिंद...

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  5. क्या बात है दीपक अब अंग्रेजी में पुस्तक निकालने का विचार है???
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  6. आपका आदेश सर आँखों पर शरद भैया, खुशदीप भैया.. खुशनसीब हूँ की आपने मुझे इस काबिल समझा..
    जय हिंद...

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  7. A few golden moments
    could get nourish in a dark day,
    with the conditional effect of
    payment of some of your breaths to me...

    Very touching lines ..... the poem u hv scribbled ... landed into my heart.... to the core.....

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  8. शायद रंग-रंगा हो गया। ठीक करे। शब्दों को भावनाओं के गहने पहनाकर रचना को दुल्हन बना दिया।


    ईनाम के तौर पर एक छोड़ जा रहा हूँ।
    अगर नींद तुम्हें नहीं आती, तो हम भी कहाँ सोते हैं,

    जब तुम्हें चुभती हैं सिलवटें बिस्तर की
    तब हम भी तो करवटें बदल रहे होते हैं।

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  9. कविता के साथ साथ सुंदर स्केच भी । अच्छे भाव , अच्छा अंदाज

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  10. दीपक बहुत कुछ कह चुकी हूँ तुम्हारी रचनाओं पर मगर फिर भी लगता है कि कुछ नही कहा
    स्वर्णिमपल कुछ पल सकते थे इक अँधेरे से दिन में
    जो अपनी थोड़ी सी साँसें तुम मेरे नाम पे देते लिख
    मैं भी फिर विश्वास से कहता अपनी अगली पीढ़ी से
    इकतरफा उसका न्याय नहीं जो सबके दिल में रहता टिक..
    एक और लाजवाब रचना बधाई और आशीर्वाद

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  11. wah wah ..chitr or angrezi anuvaad khastaur se man lubha gaye...good going

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  12. Interestingly I find translation better than original. Do you think and write in English and then translate in Hindi.
    Just curiosity. Nothing serious.

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  13. @Benami ji
    Nahin dost benami ji, main hindi me hi sochta hoon aur likhta hoon.. bas aise hi raah chalte socha ki yahan U.K. me kuchh dost english hi jante hain to unke liye translate kar diya...

    @Shree Kumarendra chacha ji
    chacha ji aap ka aasheerwad raha to jo aap soch rahe hain wo bhi poora ho jayega.. :)

    @Happy bhai
    yaar Happy abhi tak main bhi confuse hoon ki ranga karoon ki rang... maine vaise ranga hi likha tha.. :)
    Jai Hind.. Jai Bundelkhand

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  14. sketch wali ladki Urmila Mantodkar lag rahi ha....
    khubsurat kavita aur translation ka idea b zabardast ha..

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  15. You know what Deepak, some how I do agree with Benaami ji...
    The English version is definitely better than the Hindi one...it has got smooth flow of emotion..whereas I find the Hindi version more of a 'make shift' poem..for the very first time I am not too sure about the emotion part of the Hindi version...
    But for the English version I am all for it...'hats off' to your trail of thoughts...
    Keep up the good work Boy..!
    I am so proud of you..
    and about the sketch...? could have been better...:):)

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  16. शबनम जी खूब पहिचाना वो उर्मी ही है..
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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