बुधवार, 24 मार्च 2010

लघुकथा------------------------>>>दीपक 'मशाल'


पूजा के लिए सुबह मुँहअँधेरे उठ गया था वो, धरती पर पाँव रखने से पहले दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शन कर प्रातःस्मरण मंत्र गाया 'कराग्रे बसते लक्ष्मी.. कर मध्ये सरस्वती, कर मूले तु.....'. पिछली रात देर से काम से घर लौटे पड़ोसी को बेवजह जगा दिया अनजाने में.
जनेऊ को कान में अटका सपरा-खोरा(नहाया-धोया), बाग़ से कुछ फूल, कुछ कलियाँ तोड़ लाया, अटारी पर से बच्चों से छुपा के रखे पेड़े निकाले और धूप, चन्दन, अगरबत्ती, अक्षत और जल के लोटे से सजी थाली ले मंदिर निकल गया. रस्ते में एक हड्डियों के ढाँचे जैसे खजैले कुत्ते को हाथ में लिए डंडे से मार के भगा दिया.
ख़ुशी-ख़ुशी मंदिर पहुँच विधिवत पूजा अर्चना की और लौटते समय एक भिखारी के बढ़े हाथ को अनदेखा कर प्रसाद बचा कर घर ले आया. मन फिर भी शांत ना था...
शाम को एक ज्योतिषी जी के पास जाकर दुविधा बताई और हाथ की हथेली उसके सामने बिछा दी. ज्योतिषी का कहना था- ''आजकल तुम पर शनि की छाया है इसलिए की गई कोई पूजा नहीं लग रही.. मन अशांत होने का यही कारण है. अगले शनिवार को घर पर एक छोटा सा यज्ञ रख लो मैं पूरा करा दूंगा.''
'अशांत मन' की शांति के लिए उसने चुपचाप सहमती में सर हिला दिया.
दीपक 'मशाल', लघुकथा

26 टिप्‍पणियां:

  1. कहानी का लक्ष्य बहुत समर्थ भाषा में संप्रेषित हुआ है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. छोटी पर बहुत सार्थक......
    .....अब पहेलियों का नंबर है.....
    ............
    विलुप्त होती... नानी-दादी की बुझौअल, बुझौलिया, पहेलियाँ....बूझो तो जाने....
    .........
    http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html
    लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत समर्थ भाषा में संप्रेषित हुआ है ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या बात है
    बहुत सुन्दर बोधात्मक लघुकथा

    उत्तर देंहटाएं
  5. विचारों की मशाल के दीपक यूं ही प्रज्‍वलित करते रहो।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सधी हुई कथा..बधाई.

    -



    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  7. ज्योतिषी ने कह दिया तो मानना ही पड़ेगा।
    और मन शांत भी हो जायेगा ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ashant man ko shant karne ka mantra to
    swyam insan ke paas hota hai, apni antratma ki awaj suno shanti hi shanti milegi

    aapne achhi baat likhi

    उत्तर देंहटाएं
  9. सारगर्भित ………………।उत्कृष्ट लेखन का परिचायक्।

    उत्तर देंहटाएं
  10. कथा लघु, मगर सन्देश बड़ा..सार्थक लेखन के लिए बहुत बधाई दीपक!.

    उत्तर देंहटाएं
  11. दीपक जी, मैं आपको चने के झाड़ पर नहीं चढाऊंगी। यदि आप लघुकथा लिखना ही चाह रहे हैं तब उसके शिल्‍प का अध्‍ययन कर लें। मैं भी नाइस या और कुछ ऐसा ही लिख सकती थी लेकिन आपकी लेखनी और चिंतन में दम है इसलिए मैंने लिखा कि यदि किसी भी विधा को उसी विधा के शिल्‍प के अनुरूप लिखेंगे तभी वह समीक्षकों की दृष्टि में सही कहलाएगी। मैं पुन: क्षमा मांगती हूँ कि मैंने अपना छोटा भाई समझ कर परामर्श दिया है, अत: आप इसे स्‍वस्‍थ परम्‍परा के अनुरूप लेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही सधी हुई लघु-कथा...
    दीपक, तुम्हारी तारीफ में जो भी कहेंगे कम ही होगा....
    सिर्फ लेखन की बात नहीं होती ऐसी विचार ही मन में आना एक अच्छे इंसान की पहचान है...

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर आप की यह छोटी सी कहानी,

    उत्तर देंहटाएं
  14. 'laghu' katha, badee baat...!
    Ramnavmiki anek shubhkamnayen!

    उत्तर देंहटाएं
  15. मन के भावों का अच्छा अवलोकन है...ऐसी ही दोहरी जिंदगी जीता है इंसान....प्रभाव छोडने वाली कथा..

    उत्तर देंहटाएं
  16. Ajit ma'am, bas aapki tarah ek sachche margdarshak ki talash thi, shayad wo poori ho gayee.

    उत्तर देंहटाएं
  17. सत्य वचन दीपक,
    जितनी मुद्रा तुम्हारी जेब में है ज्योतिषी उसी के अनुसार शांति का जुगाड़ कर देंगे...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...