रविवार, 31 जनवरी 2010

मंदिर में रावण मधुशाला में राम हूँ मैं**********---->>>>>>दीपक 'मशाल'

वफ़ा जो नहीं बेवफा ही सही
चलो याद तो रखोगे तुम,
मेरी खूबी नहीं खता ही सही
चलो याद तो रखोगे तुम.

मंदिर में रावण मधुशाला में राम हूँ मैं
हालात ना पहचानता इसलिए बदनाम हूँ मैं
घात को मैं प्यार दूँ प्यार को देता हूँ घात
रण में हूँ गौतम तो शयन में संग्राम हूँ मैं
हूँ तो मैं मुहूर्त मगर जरा सा बहका सा
दिवाली की सुबहा औ होली की शाम हूँ मैं
न मानता मैं जानकर जात छुपे चेहरों की
सच्चाई के दामन पे झूठा इल्जाम हूँ मैं
उलटी है चाल अब 'मशाल' मिरे मोहरों की
प्यादों से करता काम खुद का तमाम हूँ मैं
आपका-
दीपक 'मशाल'
चित्र- अपनी ही तूलिका से..

26 टिप्‍पणियां:

  1. न मानता मैं जानकर जात छुपे चेहरों की
    सच्चाई के दामन पे झूठा इल्जाम हूँ मैं

    -बहुत बढ़िया...

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  2. ऊपर का शेर, फिर गज़ल और अंत में देखा चित्र - अपनी तूलिका से - सम्मोहित हो गया । कितनी विस्मित करने वाली तूलिका है आपकी । बेहतरीन ।

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  3. मंदिर में रावण मधुशाला में राम हूँ मैं
    हालात ना पहचानता इसलिए बदनाम हूँ मैं
    घात को मैं प्यार दूँ प्यार को देता हूँ घात
    रण में हूँ गौतम तो शयन में संग्राम हूँ मैं
    हूँ तो मैं मुहूर्त मगर जरा सा बहका सा
    दिवाली की सुबहा औ होली की शाम हूँ मैं
    न मानता मैं जानकर जात छुपे चेहरों की
    सच्चाई के दामन पे झूठा इल्जाम हूँ मैं
    उलटी है चाल अब 'मशाल' मिरे मोहरों की
    प्यादों से करता काम खुद का तमाम हूँ मैं

    poori ki poori kavita lajwaab ..ismein se kisi ek sher ko chunana mushkil tha mere liye...bahut maarak hain saare sher..
    aur paitings....bahut hi khoobsurat..
    sarvgunsampann ho tum ..
    khush raho..
    didi..

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  4. लाजवाब है गज़ल और फिर तूलिका का कमाल -- क्या कहने!
    बहुत सुन्दर

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  5. घात को मैं प्यार दूँ प्यार को देता हूँ घात....
    वफाओं से बेवफाई और बेवफाओं से प्यार ...
    मानव मन का विचित्र विरोधाभास ....क्यों होता है ऐसा ....
    चित्र और कविता .... निश्चित ही बहुत सुन्दर ....

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  6. उलटी है चाल अब 'मशाल' मिरे मोहरों की
    प्यादों से करता काम खुद का तमाम हूँ मैं

    सुंदर पंक्तियां दीपक भाई-आभार

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  7. मंदिर में रावण मधुशाला में राम हूँ मैं,
    हालात ना पहचानता इसलिए बदनाम हूँ मैं...

    शायद इसलिए घर वाले कहते हैं कि इस प्रैक्टीकल दुनिया के लिए अनफिट हूं मैं...

    जय हिंद...

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  8. हालात ना पहचानता इसलिए बदनाम हूँ मैं
    shandaar pankti...

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  9. सुंदर पंक्तियां दीपक भाई-आभार

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  10. बहुत सुन्दर रचना । आभार
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  11. न मानता मैं जानकर जात छुपे चेहरों की
    सच्चाई के दामन पे झूठा इल्जाम हूँ मैं
    उलटी है चाल अब 'मशाल' मिरे मोहरों की
    प्यादों से करता काम खुद का तमाम हूँ मैं
    दीपक कितनी अनुभूतियाँ अभी भी तुम्हारा पीछा नहीं छोडती । कितना चिन्तन करते हो? बहुत सुन्दर कविता है आज के इन्सान की तस्वीर। तुम्हारी सेहत कैसी है? मुझे चिन्ता है । अपना ध्यान रखना । आशीर्वाद्

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  12. sach kaha aapne aaj mandir mai ravan aur madhushala mai ram hai,

    kyonki aaj ka ram bhul chuka hai apne adarsh apne kaam, treta mai ram ne pitah ki agya ko sarvo-pari maan kiya sare jag main apna naam,
    par aaj ka ram kar raha aise-aise kaam, ki man chintan mai rah jata ek hi naam aur bo hai ravan ka naam.............

    aapki yah rachna aaj ke ram ke liye hai,

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  13. Abhi kafi theek hoon maasi aap chinta na karen.. main jaldi hi phone karta hoon aapko..

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  14. के खूब लिखा आपने .....पूरी कविता लाजवाब

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  15. सजदा कबूल करें। बहुत शानदार रचना।

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  16. अद्भुत ! और क्या कहूँ !! कविताई हो तो ऐसी ।

    पहले चित्र में तूलिका का कमाल भी देख रहा हूँ।

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  17. अतिसुंदर.....बढ़िया भाव...बधाई दीपक जी!!

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  18. bhaaaaaaaaaaaaai guru ji,,maan gaya ustaad,,,yaar while reading yr diaries i never estimated your talent that much,,today i am stunned man,,u r too good,,i really like yr thoughts like "diwali ki subah aur holi ki sham hun mein" gr8 man,,hats off 2 you,,carry on,,,dost aane wale salon mein students UP board mein tumhari b jeevni yaad kiya karenge,,,hahaha..but really good one..

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  19. न मानता मैं जानकर जात छुपे चेहरों की
    सच्चाई के दामन पे झूठा इल्जाम हूँ मैं

    सारगर्भित!

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  20. sree ram ko sree ram he rhne do
    jo mdushala me hain rhen
    hmen kya aapti hai
    pr aap arth ka anarth n kren
    aap khud ko khob gail bke
    sune khush rhen
    pr sree ram ko to chhod den
    esa dushkrm koi any mtavlmbi nhi krta
    or ydi koi or bhi kre to
    us ka bhi sfaya
    nhi to kr ke dekh lo pta chl jayega
    kitne bdbole ho
    pr app shishnuta ka mjak uda rhe hain
    isi liye apne poorvjon ko esi galiyan
    suna rhe hai
    yh kel ram ko kuchh nhi kha hai
    aap ne apni poore itihas pr thooka hai
    prntu upr ka thuka kud pr pdta hai
    is liye aap hi ise smbhale

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  21. सुंदर पंक्तियों से सुसज्जित शानदार रचना

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