शनिवार, 23 जनवरी 2010

आज का रंग कुछ अलग ही है... देखने जरूर आइये अपने मसिकागद@मशाल.कॉम पर.... दीपक मशाल..


दोस्तों आज आपके सामने कुछेक पुरानी कवितायेँ, जो कहीं प्यार सिखाती हैं तो कहीं दोस्ती के नए आयाम बतलाती हैं और आखिरी कविता जो बताती है कि आपके कल का असर आअज पर पड़ता ही है आप उसे ख़त्म नहीं कर सकते... और जो आज कर रहे हैं उसका असर आने वाले कल पर पड़ना ही है...,..लिख रहा हूँ... और साथ में दिखला रहा हूँ कुछ तस्वीरें जो मैंने अपने मोबाइल से ली हैं इसके अलावा किसी से आपका परिचय भी कराता हूँ... तो पहले कवितायेँ....

१-
चराग-ए-मोहब्बत बुझते नहीं

आंधियां आयें चाहे कितनी बडीं
धूल जमती नहीं रिश्तों पे इन
रहो तुम कहीं या रहें हम कहीं
रूहें हो जाएँ इक बस वही प्यार है
जिस्म से एक होना मोहब्बत नहीं
क्यों मांगूं खुदा से तुम्हें मैं 'मशाल'
तुम मेरे हो खुदा की अमानत नहीं.

अब कविता दोस्ती पे-
2-दोस्ती का पैमाना-
अक्सर देखा जाता है
क्या और किस वक़्त
दिया हमें,
उस शख्स ने
जो दोस्त कहलाता है.....
सदियों से चला आ रहा यही बस
दोस्ती का पैमाना है
कि बदवक़्त में जो काम आए बहुत
सच्चा दोस्त समझा जाता है.
मगर क्यों नहीं सोचती 
कुछ इस तरह दुनिया
कि क्या दिया हमने हमेशा
उस शख्स को
जिसे दोस्त कहते हैं हम,
क्यों दोस्ती में आड़े लाते हैं स्वार्थ....
जब सोच लोगे तुम कि
क्या दिया तुमने दोस्त को
बिना वापसी की उम्मीद के
उसी दिन
हाँ ठीक उसी दिन
रखोगे तुम पहला कदम
उस दहलीज़ पर
जिसे कहते हैं हम
दोस्ती का पैमाना......

३- आज
अपनी जिंदगी की
अधूरी किताब के
कुछ पिछले पन्नों को
फाड़ने की कोशिश में
मैं
नए पन्ने पे आज का
ये हिसाब भी चढ़ा गया....
और जब 
भरे हुए 
काले पन्ने जलाने बैठा
तो कुछ कोरे भी सुलगा गया.....

दीपक मशाल 
 तो ये हैं वे तस्वीरें जो मैंने कहीं किसी प्लेटफार्म पर लीं तो कोई किसी पुरानी हवेली की.... और कोई बहुत पुराने पुल की....
वैसे दिमाग में और खेल में इनका कोई सानी नहीं (कम से कम आस पास के विद्यालयों में या पूरे जनपद में तो नहीं है) क्योंकि इन्हें अंतर्विद्यालयी स्तर पर सर्वश्रेष्ठ वक्ता प्रतियोगिता का द्वितीय पुरस्कार मिल चुका है जो कि कक्षा ६ से १२ तक के विद्यार्थियों का एक साथ था जबकि दिए गए विषय पर १५ मिनट में सोच कर तुरंत बोलना था... कमाल ही है कि एक बच्चा १२ तक के विद्यार्थियों के बीच द्वितीय भी आये... पढ़ाई में अब्बल हैं तो अभिनय में भी और क्रिकेट में भी... समझ नहीं आता इन्हें बनायें क्या इसलिए सबसे बेहतर समझा कि इनके ऊपर ही छोड़ दें और तब इन्होने कहा कि मैं मॉडल और वैज्ञानिक बनूँगा... अब देखते हैं कितने कामयाब होते हैं ये... आपकी आशीष चाहिए....
 

ये नीचे दो तस्वीरें हैं
श्वेत-श्याम तस्वीर मेरी जिस मित्र की है रंगीन भी उसी की बेटी की ही है जो अभी मात्र २ महीने की है... सुनते थे like father like son.. लेकिन यहाँ तो like mother like daughter हो गया.. :)

ये हैं मेरे प्यारे मिस्टर चिंटू जी(प्रथम भाई) जिनके लम्बे बिना मुंडन वाले बालों कि वजह से इन्हें सब सरदार चिंटा
सिंह जी कहते हैं.... अरे इनकी भोली सूरत और मासूम सी आँखों पे मत जाइये... ये खतरनाक भी चींटा(Male ant) की तरह ही हैं....
और इनके साथ इनकी दीदी मेरी प्यारी बहिन साक्षी जी(ये सच में शराफत की प्रतिमूर्ति है)
 
फिर से मास्टर तथागत जी
ये हैं कविवर श्री भवानी शंकर लोहिया ''बन्धु'' जी मेरे बाबा के मित्र और वो कवि जिन्होंने मुझे 'मशाल' नाम प्रदत्त किया...
ये किस तरह के कवि हैं ये बताने के लिए सिर्फ इनकी बहुत ही मामूली २ पंक्तियाँ यहाँ दे रहा हूँ बाकी आप स्वयं ही समझ दार हैं-
''यज्ञ तुम हो आहुति मैं,
तुम मलय मैं गंध हूँ.
देवता तुम मैं पुजारी
गीत तुम मैं छंद हूँ..''

पुस्तक 'अनुभूतियाँ' विमोचन के अवसर पर....
और ये रही वो पुस्तक

कैसा लगा ये सफ़र बताएं जरूर...
आपका ही-
दीपक मशाल

21 टिप्‍पणियां:

  1. दीपक भईया आपके कविताओं का क्या कहना , बस पढते ही जैसे उसमे खो जाते हैं कहीं, हमारा छोटा माडल बनेगा क्या मुझे तो लग रहा है कि ये महाशय माडल बन ही गये हैं चलिए इसी बहाने ये भी पता चला कि मुझसे भी छोटा है कोई, और वो भी मेरा भाई, सभी तस्वीरे लाजवाब है।

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  2. बहुत सुंदर कविताये आप का भाई भी लाजबाव है जी, बाकी सभी चित्र बहुत अच्छॆ लगे, आज आप को चार पांच बार फ़ोन किया हर बार कट जाता कुछ घंटी बजने के बाद करीब समय था आप के साधे सात बजे शाम के, सभी चित्र बहुत सुंदर लगे धन्यवाद

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  3. bahut badhiya kavitayen...or aapke laghubhrata main model banne ke to sare gun najar aa hi rahe hain vegyanik bhi jarur ban jayenge ...sabhi tasveeren lajabab hain.

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  4. काले पन्ने जलाने बैठा
    तो कुछ कोरे भी सुलगा गया.....
    kuch kah nhi paa rha hun..

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  5. इतने विभूतियों से एक साथ मिलवाया -अलग अलग मिलाना था न !

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  6. दोस्ती का पैमाना ...कागजों का जलाना बहुत अच्छी तरह व्यक्त हुआ आपकी कविताओं में ...
    और तस्वीरों दे साथ आपकी यादों का हमसफ़र बनना अच्छा लगा ...
    अनुभूति की बधाई तो पहले ही दे चुके है ....!!

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  7. बहुत दिनों से जा रहे थे चुप ही सराहे
    आज सोचा कि कह ही दें।

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  8. भई वाह। बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभान अल्लाह।
    छोटे मियां तो अभी से मोडल बन ही गए हैं।
    शुभकामनायें।
    चित्रों का संग्रह अच्छा लगा।

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  9. शब्द चित्रों के साथ-साथ चित्र भी बढ़िया हैं।
    अनुभूति पढ़ने की इच्छा है!

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  10. चित्रों में शब्दात्मकता और शब्दों में चित्रात्मकता जगाना कोई तुमसे सीखे.
    ढेरों ढेर आशीष.
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  11. आपकी पोस्ट देखी.. पिछली पोस्ट्स भी देखीं..आशा और दुआ करता हूँ कि स्वास्थ्यलाभ हुआ होगा..
    ..आपकी बात से सहमत हूँ कि स्वास्थ्य संबंधी हलकी सी बात को भी गंभीरता से लेना चाहिये, मुझे लगता है कि हमारे भारतीय समाज मे अपना स्वास्थ्य लोगों के लिये उ्तनी प्राथमिकता पर नही आता है और ’चलता है’ एट्टीट्यूड भारी पड़ता है..जबकि अन्य लोग बीमारी को ले कर कितने क्रेजी होते हैं, यू के मे रह कर आप अच्छे से जानते होंगे...
    ..हाँ बीमारी पर दार्शनिक हो कर जीवन-मृत्यु पर चिंतन करने की बजाय अभी सही इलाज पे ध्यान देना ज्यादा जरूरी है आपके लिये..अभी तो ट्रेनिंग पीरिएड मे हैं..कितना कुछ करना बाकी है..
    आपकी ही कविता के उद्धरण से कोरे पन्नों को जलाने की बात न सोचिये अभी..काफ़ी कुछ लिखा जाना शेष है अभी
    शुभकामनाएं..आपको व आपके अनुज को!

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  12. और आपकी कविता-संग्रह के प्रकाशन पर बधाई!
    और प्रोफ़ेसर महेंद्र जी जैसे मूर्धन्य साहित्यविज्ञ के शीध्र स्वास्थ्यलाभ के लिये शुभकामना.

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  13. Priya Apoorva bhai... aapka aana aur pyar se ye samjhana bahut achchha laga... main aage se khyal rakhoonga..

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  14. बहुत अच्छा लगा सब कुछ...परिवार और समारोह के चित्र देखना, रचनाएँ पढ़ना और तुम्हारी बातें सुनना. महेन्द्र जी शीघ्र स्वास्थय लाभ करें.

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  15. प्रियजनों के सचित्र विवरण और आपकी रचनाएं देख आनंद आया. पुस्तक रिपोर्ट सुबीर सर के सौजन्य से पहले पढ़ चूका हूँ.

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  16. आपकी ही कविता के उद्धरण से कोरे पन्नों को जलाने की बात न सोचिये अभी..काफ़ी कुछ लिखा जाना शेष है अभी
    शुभकामनाएं..आपको व आपके अनुज को!

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  17. deepak ji

    behad dil ko chuti nazmein .......aur aapke bhai ke to kya kahne.........honhar virvaan ke hot chikne paat ........ye kahavat shayad aise hi bachchon ke liye kahi gayi hai........bahut hi sundar sanklan.

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