बुधवार, 20 जनवरी 2010

माँ तान ऐसी छेड़ना.........वसंत पंचमी पर विशेष*********दीपक मशाल

आज वसंत पंचमी के महापर्व पर आप सभी विद्वानों को बधाई देना चाहता हूँ एक बार पुनः और स्मरण कराना चाहता हूँ माँ कुमुदिप्रोक्ता का वो आशीर्वाद जो आप सबको किसी को कलमकारी के रूप में मिला है, तो किसी को चित्रकारी के रूप में, किसी को विज्ञानं के क्षेत्र में मिला है तो किसी को किसी अन्य में... येही आपकी शक्ति है जिसे आप देशहित में, विश्वहित में, मानव ही नहीं बल्कि प्राणी मात्र के कल्याण में लगा सकते हैं....
आज फिर अपने ही मोबाइल से निकाली गई ऐसी तस्वीर लगाता हूँ जो वसंत पंचमी को परिदर्शित करती है...
साथ ही एक प्रार्थना माँ हंसवाहिनी से-



                                         ये चम्बल की घाटी की तस्वीरें हैं...
नवजीवन नवसृजन की
देना हमें तुम प्रेरणा,
हम जड़बुद्धि हों कृत कृतार्थ
माँ तान ऐसी छेड़ना.
                     हम बुद्धि प्रसून  
                     कर प्रस्फुटित,
                     शिव-शक्ति का
                     हम करें सृजन.
करके सुगन्धित
जग सकल को,
करें प्रफुल्लित
हर विकल को.
                     हर अँधेरी जग गुफा में
                     ज्ञान का प्रकाश भर दें,
                     चल रहे भीषण समर को
                     अनंत तक अवरुद्ध कर दें.
हर जीव को समझा सकें
समर्थ भाषा प्रेम की,
देना शक्ति ऐसी अलौकिक
जिसका मिले कोई मेल ना.
               नवजीवन नवसृजन की...... ..
(१२ वर्ष पूर्व लिखी गई कविता है, १६ वर्ष की उम्र में, इसलिए अशुद्धियों को क्षमा करें)
आपका ही-
दीपक मशाल

21 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर तस्वीरों के साथ ...बहुत सुंदर रचना...

    मैं खुद अनाडी हूँ तो अशुद्धियाँ कहाँ से खोजूंगा.... मुझे तो एकदम परफेक्ट लगी यह यह रचना....


    GR8 Work....

    उत्तर देंहटाएं
  2. बसंत पंचमी की आपको भी बहुत-बहुत बधाई...
    सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  3. itni kam umr mein itni sundar rachna likhi thi tumne...waah !!
    ham to aaj tak nahi likh paaye hain..
    bahut khushi hui..
    basant panchami ki badhaii..
    didi..

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर रचना!!


    बसंत पंचमी की आपको भी बहुत बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं
    सुदर कवित्त-आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. खिली सरसों के खेत और कविता(पुरानी ही सही ) वसंत पंचमी को साकार कर रही है ..
    बहुत शुभकामनायें ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बसंत पंचमी की शुभ कामना!!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. अच्छी वंदना , बसंत पंचमी की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  9. माँ सरस्वती का वरद हस्त सर पे रहे

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्या कहूँ तस्वीरें सुन्दर है या रचना दोनो ही कमाल है 16 साल की उम्र मे कमाल की रचना। बसंत पंचमी की शुभकामनायें तुम्हारी पुस्तक पढ रही हूँ। अपनी सेहत का जरूर ध्यान रखना। लापरवाह हो सेहत की तरफ से।बसंत पंचमी की शुभकामनाये़, आशीर्वाद्

    उत्तर देंहटाएं
  11. नवजीवन नवसृजन की
    देना हमें तुम प्रेरणा,
    हम जड़बुद्धि हों कृत कृतार्थ
    माँ तान ऐसी छेड़ना....

    सुंदर चित्रों के साथ सुंदर गीत ......... आपको बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ ...........

    उत्तर देंहटाएं
  12. वसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ...सुंदर एवं प्रभावशाली माँ की स्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  13. Koi baat nahin Maasi aise hi aap logon ka pyar milta raha to jaldi hi theek ho jaunga..

    उत्तर देंहटाएं
  14. वाह दीपक भैया।
    इन सुन्दर तस्वीरों से देश की माटी की भीनी भीनी सुगंध आ रही है।
    शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  15. आप तो सचमुच बहुत अच्छी तस्वीरें उतारते हैं!
    यहाँ पहुँचकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई!

    --
    "सरस्वती माता का सबको वरदान मिले,
    वासंती फूलों-सा सबका मन आज खिले!
    खिलकर सब मुस्काएँ, सब सबके मन भाएँ!"

    --
    क्यों हम सब पूजा करते हैं, सरस्वती माता की?
    संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ"
    लगी झूमने खेतों में, कोहरे में भोर हुई!
    --
    संपादक : सरस पायस

    उत्तर देंहटाएं
  16. वाह !

    आनन्द आ गया

    शानदार पोस्ट !

    अभिनन्दन !

    उत्तर देंहटाएं
  17. Bahut shukriya... badi meharbani... huzoor aap mere.... blog pe aaye

    उत्तर देंहटाएं

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...