सोमवार, 25 जनवरी 2010

एक गीत############### दीपक मशाल

ना मिले आसमा ना जमीं मयस्सर होवे
बस तेरी गोद हो माँ जिसमें मेरा सर होवे
अब यही ठान के हम लड़ चले हैं तूफाँ से
के तेरे पैर हों माँ काफिरां दा सर होवे.
ना मिले आसमा.........

दरिया या समंदर हो और ना कश्ती हो
देखते-देखते उस  पार चले जायेंगे
इतनी अरदास है माँ मेरी तिरे चौखट पे
के तेरे बेटे पे माँ तेरी इक नज़र होवे
ना मिले आसमा..........

ख़ाक हस्ती मैं करुँ बुरी नज़र वालों की
रखके सूरज को तेरे सर पे आँख मूंदूं माँ
गिरे जब भी ये बदन मिले आँचल का कफ़न
और मेरी मौत का माँ दूर तक असर होवे
ना मिले आसमा..........

ऐसी हलचल के चिरें सीने सारी तोपों के
हौसले रकीबों के धूल में मिला  डालें
कोई देखे ना पलट के भी तेरे दामन पे
इस कदर रूह का भी मेरी माँ असर होवे
ना मिले आसमा...........

जागे सिंहों के शहर राख ये पड़े जिधर
सारे देशों का शहंशाह हिन्दुस्तान बने
अश्क निकले न किसी आँख से जाने पे
जो भी निकले वो सुर्ख लहू-ए-जिगर होवे
ना मिले आसमा...........
दीपक मशाल

13 टिप्‍पणियां:

  1. किस पँक्ति के लिये कहूँ बहुत ही सुन्दर गीत है एक एक शब्द--- बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिये। तबीयत कैसी है? आशीर्वाद्

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  2. गीत के एक-एक बोल जीवंत हैं...

    दरिया या समंदर हो और ना कश्ती हो
    देखते-देखते उस पार चले जायेंगे
    इतनी अरदास है माँ मेरी तिरे चौखट पे
    के तेरे बेटे पे माँ तेरी इक नज़र होवे
    ना मिले आसमा..........


    इन पंक्तियों ने तो दिल को छू लिया...

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  3. गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक सामयिक एवम सार्थक रचना।
    शुभकामनायें।

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  4. बहुत सुंदर रचना
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎं

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  5. दरिया या समंदर हो और ना कश्ती हो
    देखते-देखते उस पार चले जायेंगे
    इतनी अरदास है माँ मेरी तिरे चौखट पे
    के तेरे बेटे पे माँ तेरी इक नज़र होवे
    ना मिले आसमा..........
    Waise to pooree rachna dohrayee ja sakti hai!
    Happy Republic Day!

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  6. नया वर्ष स्वागत करता है , पहन नया परिधान ।
    सारे जग से न्यारा अपना , है गणतंत्र महान ॥

    गणतन्त्र-दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  7. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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  8. sunder abhivykti........गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.......

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर रचना
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎं

    उत्तर देंहटाएं
  10. desh bhakti se ot-prot kavita .
    gantantra diwas ki hardik badhayi.

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  11. ऐसी हलचल के चिरें सीने सारी तोपों के
    हौसले रकीबों के धूल में मिला डालें
    कोई देखे ना पलट के भी तेरे दामन पे
    इस कदर रूह का भी मेरी माँ असर होवे ...

    लाजवाब फड़कता हुवा गीत है ...... आपको गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई ....

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