सोमवार, 2 अगस्त 2010

लगता है पागल हो जाऊँगा मैं-------->>>दीपक 'मशाल'

क्या है... क्या है ये.. लोग चिल्लाये पड़े हैं की कॉमनवेल्थ खेल हमारे देश की आन-बान-शान हैं.. आखिर क्यों और कब तक हम हर चीज को देश की आन-बान-शान से जोड़ कर लोगों को गुमराह करते रहेंगे.. कब वास्तविकता के धरातल पर बैठ कर सोचेंगे हम???? भ्रष्ट नेता देश को खोखला किये जा रहे हैं.. जिस ट्रेडमिल(दौड़ने के लिए जिम में प्रयोग की जाने वाली मशीन) को लन्दन में भी ७ लाख रुपये में खरीदा जा सकता है उसे दिल्ली में सिर्फ ४५ दिन के लिए किराए पर १० लाख में खरीदा गया है.. 
इन सुरेश कलमाड़ी और शरद पवार जैसे नेताओं को क्यों नहीं हम सबक सिखाते, जबकि पुणे से लेकर दिल्ली तक सबको पता है कि वो नख से सिख तक भ्रष्ट है.... बस लगे हुए हैं कहीं सचिन की स्तुतिगान में तो कहीं 'वन्स अपोन अ टाइम इन मुंबई' जैसी खूनियों को हीरो बनाती फिल्मों को बनाने-देखने में.. आखिर क्यों हेमंत करकरे और अशोक कामते जैसे शहीदों पर फ़िल्में नहीं बनतीं? 
दूसरी तरफ क्या कोई ऐसा कानून नहीं बनाया जा सकता कि जिस किसी भी नेता को एक बार भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाए उसकी कुर्की कर दी जाए और उसका राजनैतिक जीवन भी ख़त्म कर दिया जाए... बहुत खून खौल रहा है आज.. लगता है पागल हो जाऊँगा मैं .. सिर्फ भौंके जा रहा हूँ कुत्ते की तरह.. यहाँ नीचे दी गई एक लिंक भी देखें कि कैसे पाकिस्तानी स्कूली लड़कियों के मन में उनके अध्यापक भारत के खिलाफ क्या ज़हर भरते हैं, लगता है भारत और पाकिस्तान दोनों जगह एक दूसरे को गाली देना ही देशभक्ति रह गई है.. और जो जितना ज्यादा एक दूसरे को मंच पर चिल्ला-चिल्ला के गाली दे सके वो उतना बड़ा देशभक्त... बाकी सब देशद्रोही.. ये तो अच्छा है कि उन लड़कियों ने बाद में कबूल किया कि ये सब गलत है और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए.. पर वे सब तो समझदार थीं.. उनका क्या जो अशिक्षित हैं.. वो तो कसाब बन कर भारत में हमले करने को तैयार हो जायेंगे इस तरह की बातें सुनकर..

49 टिप्‍पणियां:


  1. दीपक भाई, यह जहर बोने का काम दोनों तरफ बराबर चल रहा है। कभी मौका लगे तो संघ की कक्षा में जाइएगा।

    मुझे चेल्सी की शादी में गिरिजेश भाई के न पहुँच पाने का दु:ख है।

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  2. वाकई विचारणीय मुद्दा है
    देशभक्ति के मापदंड बदल गये हैं. भारत वाला पाकिस्तान को गाली दे तो देशभक्त और पाकिस्तान वाला भारत को तो वह देशभक्त
    कब हम हकीकत समझेंगे कि यह केवल उनके कृत्यों से ध्यान हटाने का तरीका है !!

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  3. जाकिर भाई संघ से मैं भी २-३ साल तक जुड़ा रहा लेकिन ना संघ में ऐसी कोई बात सुनी ना देखी.. हो सकता है ये सब दूसरे शहरों की शाखाओं में होता हो.. पर मैंने अपनी आँखों स एए कभी नहीं देखा हाँ बस मीडिया को कहते सुना है.. मेरे साथ तो कुछ मुस्लिम दोस्त भी संघ की शाखाओं में जाते थे.. बिना किसी भेदभाव के सिर्फ व्यायाम के लिए..

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  4. वैसे विडियो तो सकारात्मक अंत दे रहा है

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  5. सही कहा दीपकजी,

    इन नेताओं ने इस देश को पूरी तरह खोखला कर दिया है, यही हैं जो आम लोगों को भ्रष्टाचार करने पर मजबूर करते हैं ! और पाकिस्तान का क्या कहना वह अपनी बदहाली के आंसू स्वयं रो रहा है

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  6. दीपक, तुम्हारा आक्रोश जायज है। लेकिन अगर पागल हो जाओगे तो भाई ऐसे लोगों का कोई नुकसान नहीं होगा, शांत रहो।

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  7. आखिर क्यों हेमंत करकरे जैसे शहीदों पर फ़िल्में बनतीं? Bhai,aapne ek 'mrut'police wale ke aage shaheed kaise likh diya? Only Indian Army has this prerogative!Azadike baad se Police karmi army ke banisbat 10 guna adhik dharashayi hue hain,par use shahadat nahi kaha jayega!
    Aur hamare neta isi samaj ki upaj hain! Kisi prayog shalame to nahi inki nirmiti hui! We get what we deserve!!What else one can say??

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  8. विचारणीय .................. पर क्या करें देश के रक्षक ही भक्षक बन गए हैं और आम आदमी पिसता जा रहा है यहाँ भी और शायद वहां भी.............

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  9. नहीं सुमन जी यहाँ स्थिति इतनी बुरी नहीं.. हाँ भ्रष्टाचार से इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन वो ज़मीनी स्तर पर नहीं बड़े पैमाने पर बड़े लोगों द्वारा होती है कभी-कभी लेकिन जब वो पकड़े जाते हैं तो उनकी अपने यहाँ के नेताओं जैसी खातिरदारी नहीं होती.. प्रधानमंत्री को भी सबक सिखा दिया जाता है..

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  10. हमें वोटिंग के अपने हक पर ग्लानी होती है जब हम ये सब भ्रष्टाचार पढते हैं. दिल तो करता है की फिर से वोटिंग करा का एक एक को कुर्सी से उतार चप्पले मारी जाएँ.

    वीडियो लिंक सुना....पाकिस्तान से तो ऐसी ही बातों की उम्मीद की जा सकती है.

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  11. बहुत खून खौल रहा है आज.. लगता है पागल हो जाऊँगा मैं .. सिर्फ भौंके जा रहा हूँ कुत्ते की तरह..
    काट भी तो सकते हो..........

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  12. हम तो यही कह सकते हैं --मेरा भारत महान !

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  13. Sharad Pawar to sbse bhrasht neta h jo ek sadhu ka chola pehne baitha hua h.
    Minister bhe bnega, Cricket mein bhi jaega, icc mein bhi jana h, aur to aur cricket ki wajah se apni ministership bhi chodna chahta h.
    Phle apna muh to dekh le woh.
    Apni beti ko bhi politics mein le aaya aur woh bhi bhrasht h.
    Kalmadi k to kehne he kya, pta nhi kaun h kbhi koe khel khela bhi h usne, pure desh k khelo ka boss bna btha h pta nhi kbse.

    Agar humare desh mein ase neta na hote to aaj aadhi garibi kam hoti yha.

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  14. शांति भाई शांति..क्रोध से कुछ भी हासिल नहीं. क्रोध में जो भी करोगे या कहोगे, वो अक्सर गलत ही होगा. संयम भी नहीं रह जायेगा. एक बार फिर से पढ़ो-शरद पवार और कलमाड़ी.....के लिए जिस शब्द का प्रयोग किया, उससे उनका क्या बिगड़ा. सब जानते हैं कि वो क्या है..यह तो बहुत कम कहा तुमने लेकिन क्रोधवश जिस भाषा का तुम कभी इस्तेमाल करते नहीं दिखते वो भी कर गये.

    इसीलिए कहता हूँ कि शांति से सोचो. कुछ ठोस हल सुझाओ विचार करके.

    उर्जा विचार करके हल निकालने में लगाओ-चिल्लाने में नहीं.

    शुभकामनाएँ.

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  15. pahli bat aapko sachin se etni chidh kyun hai?? apne unko kai bar mudda banaya hai,,,,,,,,,,........ ab ye aap hee batayn ki aisa kya hoga jise aap desh ke an ban shan se jod kar dekh sankenge................??????????

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  16. सुना है कि विदेश जाकर कोई पागल नही होता है!
    --
    यह बीमारी तो अपने देश में ही ज्यादा पनप रही है!

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  17. आज दीपक को धधकते देखा है। हालात है, स्वयं से न्याय भी तो करना है।

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  18. सराहनीय मुद्दा उठाया है आपने, बहुत गुस्सा आता है ऐसे भ्रष्ट लोगों पर लेकिन लगता है की इसके लिए कहीं ना कहीं हम भी ज़िम्मेदार हैं!

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  19. @मिथिलेश जी, मैंने कभी नहीं कहा कि सचिन स एमुझे कोई चिढ़ है.. मैं उस लेबल तक हूँ ही नहीं कि उससे ईर्ष्या करुँ या चिढूं. ये सब हरकतें बराबर वालों के साथ की जाती हैं.. एक महान खिलाड़ी की तरह सचिन का सम्मान मैं भी करता हूँ लेकिन सिर्फ खिलाड़ी की तरह भगवान् की तरह नहीं... बेहतर होगा कि इंसान का ये भाग्वानीकरण बंद कर दिया जाए.. जो सवाल आप पूछ रहे हैं उसका जवाब ये है कि सबसे पहले तो ये छद्म देशभक्ति का नाटक बंद किया जाए क्योंकि ये एक दूसरे को छलने के अलावा कुछ नहीं करता.. देशभक्ति के ज़ज्बे को अपने दिल में ही रखा जाए तो अच्छा ना कि चौराहे पर सीना फाड़ के दिखाया जाए.. सबसे पहले ईमानदारी बहुत जरूरी है.. हर चीज से.. अपने आप से भी और औरों से भी.. समझ रहे हैं ना आप.. आन-बान-शान के लिए क्या जरूरी है उसकी कोई छोटी लिस्ट नहीं मेरे पास.. बेहतर होगा कि आप खुद तय करें कि कैसे देश को विकास की दिशा में ले जाया जाए.. फिर चाहें तो दोबारा पूछ सकते हैं, वैसे मैं स्वामी विवेकानंद तो नहीं मगर फिर भी मुझे अपने नज़रिए से बताने में खुशी होगी..

    @आदरणीय समीर जी.. गुस्से में पोस्ट में अनुचित भाषा का प्रयोग कर गया.. क्षमा चाहता हूँ और सुधार कर देता हूँ..

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  20. आवेश में आना स्वाभाविक है पर शांत भाव और शांत मनस्थिति से ज्यादा सटीक और उचित रास्ता निकाला जा सकता है.

    रामराम

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  21. इन सुरेश कलमाड़ी और शरद पवार जैसे नेताओं को क्यों नहीं हम सबक सिखाते,इनके बारे में नाम लेकर कुछ लिखने और बोलने में बहुतों की नानी मरती है ,सबक सिखाना तो दूर ... आपने नाम लेकर लिखा है अच्छी बात है ,हमसब को चोर को पूरे जोर-शोर से चोर कहना चाहिए ,ऐसा करने से ही कुछ बदलाव की शुरुआत होगी ...मंत्री पद पर बैठकर ऐसे लोग मंत्री पद के मान,मर्यादा और उसूलों को बेचकर एक सम्माननीय पद को शर्मसार करते हैं ,ऐसे लोग देश के असल गद्दार और आतंकवादी से कम नहीं हैं ...

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  22. @दीपक 'मशाल' ji

    kahna humesha hee accha lagta hai, lekin jab kabhi wah humse hokar gujarta hai tab humari bolti kyun band ho jati hai??? hum humesha dusro par arop lagte hain lekin hum khud kitna amal karte hain ye bhi mayne rakhta hai, rahi bat sachin ki to kuch dino pahle maine aapka hee lekh padha tha ki sachin ko bharat ratn nahi milna chahiye, to uske liye mai aapko ye kahna chahunga ki pahle aap aap ye clear karne ki aapke najar me deshbhakti hai kya, aur bharat ratn kise milna chahiye???

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  23. उडनतश्तरी की सलाह मान कर ठीक किया !

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  24. दीपक ने बड़ों का सम्मान करते हुए उनकी बात मानकर अपनी गलती सुधार ली ...अच्छा लगा ...हम मर्यादित शब्दों में भी अपना विरोध दर्ज कर सकते हैं ...!

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  25. दीपक भाई दिल तो बहुत जलता है...

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  26. Dipak,
    tum bahut hi samvedansheel vyakti ho...
    tum par bahut bharosa hai..agar tumhein gussa aaya hai to jayaz gussa hoga...aur fir dekho na badon ki baat maan kar apni bhool sudharnewaale bhi tum hi ho...sach mein tum par abhimaan hota hai...
    bahut bahut khush raho...
    ishwar tumhein bahut saari safaltaayein aur asheerwaad de...aise hi sabke priy bane raho...
    didi...

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  27. प्रिय दीपक

    तुमने मेरे विश्वास को और प्रगाढ़ किया है. अनेक शुभकामनाएँ.

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  28. आज दीपक की तपिश महसूस हो रही है ।आपकी चिंता और गुस्सा जायज है -’हर शाख पे उल्लू बैठा----’
    बाकी आप खुद समझ लीजिये।

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  29. आज देशभक्ति बस नाम की रह गई है..भारत और पाकिस्तान के बीच का मुद्दा तो अब सियासत कहलाता है...

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  30. सब जानते है लेकिन अंधे बने हुए है, या यूँ कहे की मजबूर है. आजादी के वक्त ये माना भी गया था कि देश को सबसे पहले विकास की जरुरत है न की प्रजातंत्र की. लेकिन नेहरु-गाँधी के आगे किस की चली है तो उस समय चलती. कुछ दिन पहले मैंने भी इसी से मिलते हुए विषय पर एक लेख लिखा था. आज भी ये यक्ष प्रश्न है कि इस जर्जर तंत्र को जिसे अब पूरी तरह बदलाव की जरुरत है उसे बदले तो बदले कौन और कैसे.

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  31. दीपक ... तुम वाकई में बहुत सेंटीमेंटल हो....

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  32. बहुत कुछ कहा जा चुका ....अब तो लोगों की इमानदारी में भी भ्रष्टाचार दिखाई देने लगा है ...

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  33. आपका गुस्सा जायज़ है लेकिन सिर्फ गुस्सा करने से कुछ नहीं होगा...जन चेतना गुस्से से नहीं आती लोगों को समझाना पड़ता है धीरे धीरे...समय रहते सब ठीक होगा...निश्चिन्त रहें...
    नीरज

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  34. अच्छा किया दीपक....तुमने लिख कर गुबार निकाल दिया....और इतने लोगों का तुम्हारी चिंता में साथ होना अच्छा ही लगा होगा...
    बस यही दुआ है की दोनों राष्ट्रों में शिक्षा का प्रसार हो, (सही अर्थों में) और राजनीतिज्ञों का छल आम जनता की समझ में आए....और दिलों से नफरत दूर हो..

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  35. दीपक भाई, संघ की कक्षा में तो नहीं, पर उनके साहित्यिक कार्यक्रमों में अक्सर जाता रहा हूँ, वैसे मौका है तो बताता चल रहा हूँ संघ की संस्था भाऊराव देवरस न्यास से सम्मानित भी हो चुका हूँ। उनके कार्यक्रमों में अक्सर इस तरह की भावनाएँ प्रस्फुटित होते हुए देखा है। एक गोष्ठी में तो बाकायदा उर्दूं की धज्जियाँ उड़ाई जा रही थी, जैसे कि उसमें कोई ग्रामर नहीं है, उसका कोई इतिहास नहीं वगैरह वगैरह। उसी दिन से जाना बंद कर दिया।

    …………..
    स्टोनहेंज के रहस्यमय… ।
    चेल्सी की शादी में गिरिजेश भाई के न पहुँच पाने का दु:ख..

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  36. कितना ही रो लो चीख लो चिल्ला लो यहाँ कोई फ़र्क नही पड्ने वाला……………जैसा है वैसा ही चलता रहेगा ये कहना है यहाँ के नेताओं का…………वो कहते हैं जनता मरती है मरे ,देश बरबाद होता है हो जाये मगर हम नही सुधरेंगे सिर्फ़ अपने लिये जीते हैं और अपने लिये ही मरेंगे………………इसलिए हमारे आपके जैसे लोगों की आवाज़ नक्कारखाने मे तूती की आवाज़ जैसी है जिसकी कहीं कोई सुनवाई नही।

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  37. दीपक, शांत चित से बस इंतज़ार करो...

    वो सुबह कभी तो आएगी...

    जय हिंद...

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  38. nikaal lia gubaar ? achha kia ..cool down..
    khushdeep ji se sahmat..vo din akbhi to aayega.
    aur han sangh ki baat par tumse bhi sahmat...vahan kisi bhi tarah kisi ke bhi khhilaf koi baat nahi sikhai jati...

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  39. देश बाँटने का जो खेल चल रहा है उस पर मुझे भी बहुत गुस्सा आता है... गुस्से पर काबू रखें.. उस को दिशा दें.

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  40. kya kare khinjh to uthti hai aesi baato aur haalato se ,aapne likh kar sahi kiya .

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  41. krodh jayaj hai, lekin CWG jaruri hai ya nahi ye vicharniya mudda nahi hai.........ya fir isme kisne kitne ghotale kiye........ye mudda bhi abhi vartman me nahi hona chahiye.........chunki Indian Govt. ne iska host banane k liye koshish ki aur hame isko host karne ka mauka mila to abhi sabse pahle isko sach me HIT karna hi sarvopari mudda hona chahiye..........:)

    rahi baat deshbhakti ki ya Karkare jaise sahido ko yaad karne ki.......Deepak jee, aam janta beshak once upon time in mumbai jaisee movie dekhe lekin unke mann me Karkare jaise deshbhakt aaj bhi baste hain........

    aapka ye post mujhe thora confusing laga.........sab kuchh aapne mila diya hai......:)

    waise aap ek shandaar vyaktitwa ho........ye mujhe pata hai..:)naraj mat honaaaaaa

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  42. भाईजान, आप चूक कर गए. जब नाम ही 'common wealth' है तो 'share' तो होगी ही. वैसे भी भ्रष्टाचार नेताओ का जन्मसिद्ध अधिकार है. आप इसमे दखलंदाजी न करे.आप दिल पर न ले. दिमाग पर भी न ले और पागल होने से बचे.

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  43. very well said dear!! really rastramandal khelo k peeche koi aur hi paiso ka khel chal raha hai!!waise kuch din hi inki charcha news channels mai rahengi,fir sab sant!!
    Anyway do read my post --http://manishrajora.blogspot.com/2010/08/tell-who-is-lucky.html

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  44. संघ की शाखाओं में मैने भी ऐसा नही सुना और न देखा .. ये मीडीया की सोच है ... आज ज़रूरत है देश के भ्रष्ट नेताओं से मुक्ति पाने की .... न की द्वेष बढ़ाने की ...

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