सोमवार, 21 दिसंबर 2009

'बुद्धा स्माइल'@@@@@दीपक मशाल

'बुद्धा स्माइल'
यही रखा था नाम
परमाणु परीक्षण का...
महान हिन्दोस्तान ने,
मगर
क्यों मुस्कुराये बुद्ध?
ये रहस्य बन गया सदा के लिए...
क्या हमारी नादानी पर?
या मोक्ष के इस नए मार्ग पर
जो सीखा था हमने..
कीमती समय
और बहुत कुछ गँवा कर..
कितने बड़े -बड़े दिमाग
उलझाकर..
इस काम में खपा कर..
वैसे.....
बुद्ध मुस्कुराये थे तब भी
जब
सामने खड़ा था उनके
मदमस्त पागल हाथी..
जब खड़ा था अंगुलिमाल..
जब खड़ा था बाघ
और जब
सामने खड़ी थीं यशोधरा
राहुल को दान करने के वास्ते..
वो मुस्कुराये थे तब भी
जब हुआ था आत्मबोध,
बुद्ध मुस्कुराते थे
पीड़ा में भी
बुद्ध मुस्कुराते थे हर्ष में भी...
क्योंकि
दोनों थे सम उनको...
बस इसीलिए
ये बन गया
अज़ब रहस्य सदा के लिए
कि
व्हाई 'बुद्धा स्माइल'?

दीपक मशाल

16 टिप्‍पणियां:

  1. बुद्ध मुस्कराये क्योकि वे थे शुद्ध
    परमाणु परीक्षण (संहारक) का नाम बुद्धा स्माईल (शांतिदायक) रखा गया शायद इसलिये मुस्कराये बुद्ध.
    शानदार रचना

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  2. एक मौलिक प्रश्न खड़ा किया है आपने इस रचना के माध्यम से। एक अलग अंदाज दीपक जी। वाह।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  3. ये बन गया
    अज़ब रहस्य सदा के लिए
    कि
    व्हाई 'बुद्धा स्माइल'?
    लाजवाब।

    उत्तर देंहटाएं
  4. हिंसा नही अहिंसा से शांति मिलेगी , शायद इसीलिये 'बुद्धा स्माइल'
    वैसे इस रहस्य को समझना आसान नही

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  5. ओह मैने तो सोचा को तुम आजकल कुछ लिख नहीं रहे हो न ही ब्लागजग्त मे तुम्हारी उपस्थिति अधिक देखी इस लिये ब्लाग तक भी नहीं आयी थी। आज देखा तुम तो छुट्टियों मे भी ब्लाग से चिपके रहे हो। बहुत सुन्दर कविता है ।जब मिलोगे तो राज़ पूछूँगी कि इतना अच्छा कैसे लिखते हो। शुभकामनायें

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  6. बहुत सुन्दर रचना है। बुद्ध की मुस्कराहट सच मे अनोखी थी.....

    ये बन गया
    अज़ब रहस्य सदा के लिए
    कि
    व्हाई 'बुद्धा स्माइल'?

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिस दिन इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कराना सीख लेगा, उस दिन इन्सान भी बुद्ध बन जायेगा।
    यही समझ में आता है, आपकी रचना पढ़कर।
    एक अच्छी रचना के लिए बधाई।

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  8. wakai gahari soch hai aapki, apne to kamaal ki kavita kahi hai. likhate rahiye!!!!!!!!!!

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  9. बुद्ध मुस्कुराते थे
    पीड़ा में भी
    बुद्ध मुस्कुराते थे हर्ष में भी...
    क्योंकि
    दोनों थे सम उनको...
    बुध्द यो्गी थे, योगी ही समभाव को धारण कर सकता है।
    समुत्वम योग उच्यते
    सुंदर अभिव्यक्ति

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  10. 'बुद्धा स्माइल'
    यही रखा था नाम
    परमाणु परीक्षण का...
    महान हिन्दोस्तान ने,
    मगर
    क्यों मुस्कुराये बुद्ध?

    सटीक सवाल है.

    रामराम.

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. दीपक जी सच कहूँ तो इस कविता की प्रशंसा के लिये मेरे पास शब्द नही हैं..एक अच्छी कविता की यही पहचान भी होती है..जो पाठक को एक नयी सोच एक नया नजरिया देती है..एक ही चीज पर नये ऐंगल से दृष्टिपात..साहस चाहिये ऐसी बात कहने के लिये
    बुद्ध मुस्कुराते थे
    पीड़ा में भी
    बुद्ध मुस्कुराते थे हर्ष में भी...
    क्योंकि
    दोनों थे सम उनको...

    इतना लिख देने के बाद यह मुस्कान अब कोई रहस्य नही रह जाती..सबको समझ आना चाहिये यह बात..

    उत्तर देंहटाएं
  13. दीपक जी ...क्या खूब लिखा भाई...कितना बढ़िया और अलग सोचा आपने..धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  14. हम्म्म्म....हम भी सोचने लगे हैं क्यों रखा है बुद्धा स्माईल ....!!

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