मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

सबलों का शस्त्र ))))))))))))) दीपक मशाल

जो मज़हब का
मतलब,
जो धर्म का
मर्म...
सिर्फ
और सिर्फ,
त्रिशूल और
तलवार,
घात और प्रहार
समझते हैं...
वो कमज़ोर हैं
हर तरह से
और निहत्थे हैं आत्मास्त्र से..
वो
जला सकते हैं
देह को,
पर आत्मा को
छू भी नहीं पाते
और प्रेम जिला सकता है
आत्मा,
कहा है वासुदेव ने भी...
''नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि.. नैनं दहति पावकः...''
देह का है अंत
और
देहनाशक का भी..
है आत्मा अनंत
और
प्रेम भी..
बस यही कारण है
कि
बम
बुजदिलों का
और प्रेम
सबलों का शस्त्र है...

दीपक मशाल

18 टिप्‍पणियां:

  1. बस यही कारण है
    कि
    बम
    बुजदिलों का
    और प्रेम
    सबलों का शस्त्र है...

    बहुत ही गहरे भाव लिये हुये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. देह का है अंत
    और
    देहनाशक का भी..
    है आत्मा अनंत
    और
    प्रेम भी..
    बस यही कारण है
    कि
    बम
    बुजदिलों का
    और प्रेम
    सबलों का शस्त्र है...

    isse sahi baat aur koi nahi...
    prem karna vastav mein sabalon ka kaam kaam..nafrat karne ke liye koi jatan nahi karni padti..
    lekin prem karne ke liye naa jaane kitni kamiyon ko nazarandaaz karna padta hai...
    jeewan ki sacchai yahi hsi..
    bshut sundsr ksvits..

    kshsn ho tum Deepak ??
    aa gaye ho kya ???
    ..Didi

    उत्तर देंहटाएं
  3. isse sahi baat aur koi nahi...
    prem karna vastav mein sabalon ka kaam kaam..nafrat karne ke liye koi jatan nahi karni padti..
    lekin prem karne ke liye naa jaane kitni kamiyon ko nazarandaaz karna padta hai...
    jeewan ki sacchai yahi hsi..
    bahut sundar kavita..

    kahan ho tum Deepak ??
    aa gaye ho kya ???
    ..Didi

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह धर्म का सुदर विश्‍लेषण .. धर्म के मूल तत्‍व को हमें याद रखना चाहिए !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बस यही कारण है
    कि
    बम
    बुजदिलों का
    और प्रेम
    सबलों का शस्त्र है...

    waah ...........bahut hi sarthak baat kitni sahajta se kah di..........kabil-e-tarif.

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह दीपक बहुत गहरे शब्द लिखे आज ....बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  7. और निहत्थे हैं आत्मास्त्र से..
    वो
    जला सकते हैं
    देह को,
    पर आत्मा को
    छू भी नहीं पाते
    और प्रेम जिला सकता है
    आत्मा,
    बहुत ही सुन्दर भाव हैं कविता के...काश सबकी समझ में ये आ जाए ये बात

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत फलसफाना बात बहुत सरलता से कह दी आपने सटीक रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बस यही कारण है
    कि
    बम
    बुजदिलों का
    और प्रेम
    सबलों का शस्त्र है...

    अच्छा सन्देश देती हुई रचना।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी मान्यता पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। रचना अच्छी लगी ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही गहरी बात, लेकिन आपने बहुत ही सहजता से कह दी। बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छे सन्देश के साथ आपने अपने भावों को कह दी ......बहुत बहुत बधाई !!

    उत्तर देंहटाएं
  13. बम
    बुजदिलों का
    और प्रेम
    सबलों का शस्त्र है...

    सही निष्कर्ष

    उत्तर देंहटाएं
  14. दीपक कविता में शिल्प के लिये मेहनत करना ज़रूरी है .. यही समय है ।

    उत्तर देंहटाएं
  15. अरे आप वापस आ गये? मुझे पता ही नहीं चला। कैसा रहा देश-भ्रमण।

    कविता अच्छी बनी है। ऊपर शरद जी की टिप्पणी काबिले-गौर है।

    उत्तर देंहटाएं

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...